उत्तराखंड – सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर वितरण किए गए नमक के अधोमानक पाए जाने के बाद अब राशन विक्रेताओं की भी घेराबंदी करते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया गया है।

नोटिस मिलने के बाद राशन विक्रेता संगठन ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अपना रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह नमक राशन विक्रेताओं ने स्वयं नहीं खरीदे। सरकार की ओर से खरीद कर सरकारी गोदाम के माध्यम से ही सरकारी पैकिंग कर दुकानों में दिया गया था। इस नमक मे मिलावट होने या अन्य किसी भी तरह की शिकायत के लिए वह जिम्मेदार नहीं है। बल्कि इसकी खरीद करने व इसको देने वाला है इसमें दोषी है। यहां बता दें कि कुछ समय पूर्व विभिन्न संगठनों व अन्य लोगों की ओर से राशन की दुकानों में मिलने वाले सरकारी नमक में मिलावट होने को लेकर इंटरनेट मीडिया पर जमकर प्रचार प्रसार किया था। जिसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश भर में राशन की दुकानों में बांटे जाने वाले नमक को खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से सैंपलिंग कर रुद्रपुर स्थित लैब में जांच के लिए भेजा था। जांच में नमक में अघुलनशील पदार्थ पाए जाने पर सचिव खाद्य की ओर से प्रदेश भर में इस नमक वितरण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद यह मामला शांत होने लगा था। परंतु अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त की ओर से इस मामले में राशन विक्रेताओं, खाद्य गोदाम, नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड बल्लूपुर चौक व नामिनी गंधार फूड प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड गुजरात को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर अन्य लैब में इस नमक की जांच हेतु अपील करने की बात कही गई है। अपील न करने पर इस रिपोर्ट को ही अंतिम और सही मानते हुए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत कार्रवाई की चेतावनी हेतु नोटिस जारी किए गए है।

वहीं आल इंडिया फेयर प्राइस शाप डीलर फेडरेशन उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष रेवाधर ब्रजवासी ने कहा कि पहले विभाग विक्रेताओं को जबरन नमक बेचने पर विवश करता है बाद में इसमें मिलावट पाए जाने पर विक्रेताओं के विरुद्ध ही कार्रवाई होती है। जिसे सहन नहीं किया जाएगा और इसका पुरजोर विरोध होगा। प्रदेश महामंत्री संजय शर्मा ने इस मामले में राशन विक्रेताओं को नोटिस जारी करने पर अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सील बंद नमक सरकारी गोदाम के माध्यम से राशन विक्रेताओं को वितरण के लिए दिया था। परंतु अब इसमें मिलावट पाए जाने पर राशन विक्रेताओं को इसमें लपेटना उचित नहीं है। यदि राशन विक्रेताओं के विरुद्ध इस कार्रवाई को तत्काल नहीं रोका गया तो राशन विक्रेता इसको लेकर आंदोलन भी करेंगे।
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दोस्ती पाए जाने पर इस तरह की हो सकती है कार्यवाही
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत, मिलावटी नमक बेचने पर गंभीर अपराध माना जाता है। मिलावट की गंभीरता के आधार पर, दोषी पाए जाने पर 6 महीने से 7 साल तक की कैद हो सकती है और 1 लाख रूपये तक का जुर्माना भी हो सकता है। यदि मिलावटी नमक से किसी की मृत्यु हो जाती है, तो आजीवन कारावास या 10 साल तक की कैद हो सकती है।