ऋषिकेश – यदि आप 50 की उम्र पार कर चुके हैं तो समय रहते कुछ जरूरी टीके लगाना न भूलें। बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य देखभाल के चलते इन जीवन रक्षक टीकों का लगाया जाना बहुत जरूरी है। यह टीके न केवल गंभीर किस्म के संक्रामक रोगों से रक्षा करने में कारगर हैं अपितु ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करते हैं। टीकाकरण की यह सुविधा एम्स ऋषिकेश में उपलब्ध है और सप्ताह भर संचालित होती है।

प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक एम्स ने बताया की प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण ढलती उम्र कई परेशानियां लेकर आती हैं। खासतौर से डायबिटिक रोगियो को इस उम्र में विभिन्न रोग अपनी चपेट में ले सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि 50 की उम्र पार करते ही प्रत्येक व्यक्ति वयस्क टीकाकरण (एडल्ट वैक्सीनेशन) को अपनाए और स्वयं को निरोगी रखे। हांलाकि कई लोगों का मानना होता है कि वो बचपन में अधिकांश टीके लगा चुके हैं लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि बचपन में लगाए गए टीकों का असर अधिकतम 35 साल की उम्र तक ही प्रभावी रहता है। उसके बाद शरीर में वैक्सीन निष्प्रभावी होने लगती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होते ही बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है।
एम्स में सामुदायिक चिकित्सा विभाग की हेड प्रो. वर्तिका सक्सैना ने बताया कि 50 से अधिक उम्र के लोगों में निमोनिया, खांसी-जुकाम और संक्रमण से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है। इस उम्र के लोगों का स्वास्थ्य खराब होने पर प्रत्येक 10 में से 3 लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि बीमारियों से बचने के लिए ऐसे लोगों के लिए एडल्ट वैक्सीनेशन की सुविधा एम्स में उपलब्ध है। ताकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे और उन्हें गंभीर स्थिति का सामना न करना पड़े। इनमें इन्फ्लूएंजा, हेपेटाइटिस, टेटनस, निमोनिया, वैरीसेला आदि के टीके शामिल हैं। प्रो. वर्तिका ने बताया कि टीकाकरण कार्यक्रम सप्ताह के सभी कार्यदिवसों में संचालित होता है।
टीकाकरण केन्द्र की नोडल ऑफिसर डा. स्मिता सिन्हा ने कहा 50 से अधिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति को इन टीकों को लगाने के लिए जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी से 31 मार्च तक संस्थान के टीकाकरण केन्द्र में पिछले 3 महीनों के दौरान 600 से अधिक लोगों को यह टीके लगाए जा चुके हैं। बताया कि डायबिटिक रोगी, बाह्य देशों की यात्रा करने वाले नागरिक, समुद्री जहाज से यात्र करने वाले, हज यात्री और कुम्भ मेले में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए इन टीकों का लगाया जाना बहुत जरूरी है।
ऋषिकेश। 50 की उम्र पार चुके लोगों में सबसे अधिक मामले सांस लेने में दिक्कत, छाती में निमोनिया होना, ज्यादा ठंड लगना और सांस फूलने जैसी बीमारियों के देखे जाते हैं। इसके लिए एडल्ट वैक्सीनेशन कार्यक्रम में ’न्यूमोकोकल’ वैक्सीन लगाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा जिन लोगों में बचपन में चिकन पाॅक्स न हुआ हो उनको ’वैरीसेला’ वैक्सीन लगाना बहुत जरूरी है। चिकन पाॅक्स का वायरस सांस की नली के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और फिर शरीर की सभी नसों में फैल जाता है। इससे पूरे शरीर में लाल चकते उभर आते हैं। यह एक घातक बीमारी है। डाॅ. वर्तिका ने बताया कि इनके अलावा लिवर रोगों से बचाव के लिए टाईफाइड, एचई-ए और एचई-बी, छाती संबन्धित रोगों से बचाव और इम्युनिटी मजबूत करने के लिए इन्फ्लूएंजा और टिटनेस तथा डिपथेरिया व परट्यूसिस से बचाव के लिए टीडीएपी वैक्सीन लगायी जाती है।
’’वयस्कों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम यह सुनिश्चित करता है कि उनमें प्रतिरक्षा प्रणाली बनी रहे और समय रहते बीमारियों का प्रकोप रोका जा सके। उम्र बढ़ने के साथ 50 पार करते ही प्रतिरक्षा प्रणाली आमतौर पर कमजोर हो जाती है और प्रतिरक्षा में यह कमी उन संक्रमणों और बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकती है जिन्हें रोका जा सकता है। यह टीके न केवल संक्रमण से बचाव करते हैं अपितु बीमारियों की गंभीरता को कम करने में भी सहायक हैं।