उत्तराखंड

प्रोजेक्ट सह जीवन – मानव वन्यजीव संघर्ष का समाधान

डोईवाला-  “प्रोजेक्ट सह-जीवन” न केवल लच्छीवाला रेंज के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बचाने का एक प्रयास है, बल्कि यह मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने का एक आधुनिक मॉडल भी है।


प्रोजेक्ट सह-जीवन: एक संक्षिप्त विवरण
लच्छीवाला रेंज में वन क्षेत्राधिकारी मेधावी कीर्ति के नेतृत्व में इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य “समझदारी से प्रकृति के साथ जीना” है। इसके मुख्य बिंदुओं को चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
1. स्वच्छता और निवारक उपाय (Preventive Measures)


* वेस्ट मैनेजमेंट: वन क्षेत्र में कचरा फैलाने पर रोक और पर्यटकों से अपना कचरा वापस ले जाने की अपील।

* भोजन निषेध: जंगली जानवरों (जैसे बंदरों) को खाना खिलाना पूरी तरह प्रतिबंधित करना, ताकि वे मानवीय बस्तियों की ओर आकर्षित न हों।

* ध्वनि और प्रकाश नियंत्रण: रात के समय तेज आवाज, फ्लैशलाइट और वाहनों की तेज गति पर नियंत्रण।

2. तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance)

* ड्रोन सर्विलांस: हवाई निगरानी के जरिए वन्यजीवों की लोकेशन पर नजर रखना।

* सेंसर ट्रैकिंग: संवेदनशील इलाकों में सेंसर का उपयोग ताकि संघर्ष की स्थिति से पहले ही अलर्ट मिल सके।

* डेटा एनालिसिस: वन्यजीवों की गतिविधियों का डेटा तैयार करना ताकि भविष्य की योजनाएं सटीक बन सकें।

3. सामुदायिक सहभागिता (Community Engagement)

* स्थानीय समुदायों और पर्यटकों के साथ निरंतर संवाद कार्यक्रम।

* स्कूली बच्चों के लिए शैक्षिक अभियान ताकि नई पीढ़ी में सह-अस्तित्व की भावना जागृत हो।

4. त्वरित प्रतिक्रिया (Rapid Response)

* किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए प्रशिक्षित टीमों (QRT) की तैनाती।

* वैज्ञानिक तरीकों से रेस्क्यू और वन्यजीवों का पुनर्वास।
मुख्य संदेश: “स्वच्छ वन – सुरक्षित वन्यजीव – स्वस्थ भविष्य।”

यह देखकर खुशी होती है कि लच्छीवाला रेंज प्रशासन केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर न रहकर तकनीक और जन-भागीदारी का भी सहारा ले रहा है।

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